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परिस्थितियों से वीरान बचपन को मिली नई उड़ान, सड़क से स्कूल तक पहुँची दो बेटियाँ

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परिस्थितियों से वीरान बचपन को मिली नई उड़ान, सड़क से स्कूल तक पहुँची दो बेटियाँ

देहरादून, 23 जनवरी । बालश्रम और भिक्षावृत्ति के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) एक मानवीय और प्रभावी पहल के रूप में सामने आया है। यह केंद्र विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे बच्चों को सुरक्षा, परामर्श और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन को नई दिशा दे रहा है।

इसी क्रम में सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान एक दुकान पर काम करती हुई दो नाबालिग बालिकाएँ पाई गईं। जिला प्रशासन की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों बालिकाओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के उपरांत उनकी काउंसलिंग की गई तथा माता-पिता से संवाद स्थापित कर बालश्रम के दुष्परिणामों, बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

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सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद दोनों बालिकाओं का इंटेंसिव केयर सेंटर में नामांकन कराया गया, जहाँ उन्हें संरक्षण, परामर्श और शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके पश्चात बालिकाओं को साधुराम इंटर कॉलेज में नामांकित कर औपचारिक रूप से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया। पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए उन्हें किताबें, स्कूल बैग और जूते भी वितरित किए गए।

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जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशानुसार जनपद में बालश्रम और भिक्षावृत्ति के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बच्चे के समग्र पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इंटेंसिव केयर सेंटर के माध्यम से बच्चों को योग, संगीत और खेल जैसी गतिविधियों से जोड़ते हुए सुरक्षित वातावरण में आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नागरिक बनाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

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जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, जबकि रेस्क्यू किए गए बच्चों को हर संभव सहायता प्रदान कर उनका भविष्य संवारा जाएगा।

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