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मानसून से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन, डीएम ने सभी विभागों से 7 दिन में मांगा माइक्रो प्लान…

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मानसून से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन, डीएम ने सभी विभागों से 7 दिन में मांगा माइक्रो प्लान…

देहरादून, 1 जून। आगामी मानसून एवं संभावित आपदाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में सभी संबंधित विभागों को सात दिन के भीतर माइक्रो लेवल प्लान तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आपदा प्रबंधन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक विभाग को जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियां सुनिश्चित करनी होंगी।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को नदी-नालों और जल निकासी तंत्र की युद्धस्तर पर सफाई कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही जलभराव संभावित क्षेत्रों में टास्क फोर्स और कंट्रोल रूम स्थापित कर दैनिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को संभावित संपर्क-विहीन गांवों की सूची तैयार करने, जलभराव प्रभावित स्थलों का चिन्हीकरण करने तथा त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) गठित करने के निर्देश दिए। नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा गया।

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लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई को सभी भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का पुनः सत्यापन करने, मशीनरी और मानव संसाधन पहले से तैनात रखने तथा वैकल्पिक मार्गों का चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए गए। मानसून के दौरान अवरुद्ध मार्गों को शीघ्र खोलने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने को भी कहा गया।

स्वास्थ्य विभाग को संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं, विशेषकर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों का चिन्हीकरण कर समय रहते सुरक्षित स्थानों या अस्पतालों में स्थानांतरित करने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए सात दिन के भीतर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया।

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जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग को ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए, जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को नदी-नालों अथवा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ता है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर गांव स्तर पर वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

विद्युत विभाग को जर्जर पोलों और झूलती विद्युत लाइनों की मरम्मत, जबकि जल संस्थान एवं पेयजल निगम को पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य मानसून से पहले पूरा करने को कहा गया।

बैठक में पर्यटन विभाग को संवेदनशील स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग लगाने, जबकि बीएसएनएल को आपदा के दौरान संचार व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए। पुलिस, अग्निशमन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा विभागों को भी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूरी तैयारी रखने को कहा गया।

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जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि मानसून अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर तैयारियां पूरी करने और नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, उप जिलाधिकारी डोईवाला, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि कुछ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

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